अपने अपने अंदाज बयां करते हैं लोग

हर मुद्दों को मोड़ देते है सियासत की ओर

बड़ा मुश्किल दौर में देश का अवाम खड़ा है

कुछ भी समझ पाने में अंजान पड़ा है,

अवाम जो देश का नायक लोकतंत्र का

उसके उसूलों को उलझा दिया बहस तंत्र का

बंट गया हर कौम हर धर्म बंट गया

सियासत के महाजाल में उलझकर रह गया ।