आपदा (तबाही)

कभी कभी जिन्दगी ,

सवाल बन जाती है,

हम जितना कोशिश करते हैं ,

और ऊलझ जाती है,

कोई अब तक ना समझ,

पाया इस हकीकत को,

क्यों पलभर में ही जिन्दगी,

की हसरते खाक हो जाती है,

जो आरजू मन में बसाये रखें,

उनको हासिल करने में,

जिन्दगी गुजर जाती है,

एक पल के आपदा में ही,

जीवन की नीव ढह जाती है,

क्या ईश्वर भी खेल करते हैं,

आम इंसानी जिंदगियों से,

एक पल में ही जिन्दगी की,

हर खुशियाँ मिटा देते हैं ।।