जीवन के इस यात्रा में
इंसान अकेला चलता है,
चाहे धूप की तपन से
लथपथ हो या बारिश में हो
भीग रहा,
रुक सकता नहीं बाधाओं से,
गतिमान सदा वो रहता है,
जीवन के इस यात्रा में
इन्सान अकेला चलता है ।
संगी साथी ना हमराह कोई,
अकेला ही बस चलना है,
पथरीली राहें हों अगर,
बिना रुके ही चलना है,
इस जीवन यात्रा में जो बाधाएं
हैं उनसे लडना है,
जीवन एक पथिक है
बस जीवन भर चलता रहता,
जीवन के इस यात्रा में
इन्सान अकेला चलता है ।।

