आदिपुरुष के निम्नस्तरीय संवाद
क्या संदेश देता है,
जिनको हम सब अपना आराध्य मानते हैं
पूजा करते हैं,
उनकी छवि को धूमिल नहीं करता है ।
क्या कल्पना की जा सकती है किसी लेखक
रचनाकार की सोच इतनी निम्न हो सकती है,
रामायण हमारे सनातन धर्म की विरासत
रामायण के सारे चरित्र की छवि सबके दिलों
में भगवान आराध्य की है,
हनुमान जी हर इंसान के मस्तिष्क में एक संकट
मोचक महापराक्रमी और कष्ट निवारक हैं,
उनके मुंह से घटिया संवाद बुलवाना कितना
अशोभनीय और चिंताजनक हैं ।
अगर किसी फिल्मकार और रचनाकार की
स्क्रिप्ट धार्मिक चरित्रों पर हो तो कम से कम
भाषा और संवाद चरित्र के अनुकूल और
आदरणीय हो ना की ओछा और अशोभनीय ।।

