मैं बैठा जो अधूरी तस्वीर को

पूरा करने के लिए,

तस्वीर बार बार बिगड़ जाती है,

लाख शिद्दत से बनाता हूं मगर

तस्वीर भयावह हो जाती है,

आज हर तस्वीर का रंग बदरंग

नजर आता है,

रंग भरता हूं बार बार रंग उड़ जाता है,

एक भयानक सा तस्वीर फिजा में

तैरता नजर आता है,

जो मां भारती के तस्वीर को धुंधला

करने को आतुर,

इस भयावह तस्वीर को मिटाने की कोशिश

मेरी तस्वीर का चेहरा छिप जाता है ।।