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सन्नाटा


सोचा न था, इतना सन्नाटा छा जाएगा,पल-पल बीते ऐसे जैसे, मुझको ही खा जाएगा ।

जीवन के इस कौतूहल में,ली साँस कभी या भूल गये किस पल में ।

वक़्त भी थमकर मुझसे यह पूछे,एक वक़्त था कभी जब तुम आगे और मैं पीछे ।

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