दुनिया में खुशियाँ दिखती कम पर,

हँसने वाले पर काफ़ी अपने गम पर ।

अपनी फाफलता का माप मात्र कि, कितना कौन जला,

फिर भी तू बस करते चला भला ।

 

सबको आगे जाने की होड़ है,

फिर हुम्दर्द का क्यों चादर ओढ़ हैं ।

तबतक ही बस जबतक उसका समय नहिीन ढला,

फिर भीइ तू बस करते चला भला ।

 

आगे वाले की आड़ में, कितने पीछे से आगे बढ़े हैं,

कितने ऐसे हैं जो उठाए उनको, जो नीचे गिरे पड़े हैं ।

मुश्किल समय में, अच्छाई उभरे तो है कला,

फिर भी तू बस करते चला भला ।

 

धोखे की आँधी चलेगी,

संदेह की बारिश भी होगी

किसी को भी मान ना होगा, कितना तूने सहा,

फिर भी तू बस करते चला भला ।

 

मन ऐसे टूटा, सोचा दे दूँ अच्छाई को धोखा,

पल में कैसे कर दूं ऐसा जब आजीवन यह ना सीखा ।

सच्चाई और अच्च्छाई खुद ही लेगी अपना बदला,

बस तू आगे भी ऐसे, करते चला भला