तलाक़'s image
एक लफ्ज़ को बस तीन दफा कह कर के, तुमने मुझको सनम कहीं का भी नहीं छोड़ा है।
किसको अपना कहूँ किसको बेगाना तुम ही कहो, अब भरोसा तो किसी का भी नहीं छोड़ा है।। अब ज़माने में कैसे ढोऊँगी लानत सब के, जो दुआ देते थे वो उँगलियाँ उठाएंगे। मैन तो जिंदगी तुमको समर्पित की थी, इसको भी लोग मेरी कमी बताएं
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