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नया साल...


इस सो चुके शहर में भी इक सहर था, रात बीतने को थी,और आखरी पहर था। खुली जो आँख तो बढ़कर के इस्तक़बाल किया, इक नया साल अब मेरा हमसफ़र था।।

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