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अपने


अब कौन सी जीने की वजह छोड़ आए हो, अपनों से जो तुम मुँह भी अपना मोड़ आए हो। करते हो जहाँ तुम शिकायत टूटने की दिल, कितनों का दिल तुम देखो वहाँ तोड़ आए हो।।

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