अपनी मेहनत पसीने के बिन ढूँढता हूँ, कैसे मिलता सुकून रात दिन ढूँढता हूँ। जब भी बाज़ार में मैं पहुंचता हूँ सादिक़, जेब पर हाँथ रख अच्छे दिन ढूँढता हूँ।।