है कौन यहां पर किसका जग में ,किससे किसका नाता है |

जब तक स्वार्थ रहा मन में तब तक ही जगत लुभाता है,

सुख के साथी सभी यहां दुख में कोई काम ना आता है।।

जग की रीत यही है सुन लो सब मतलब के यार यहां,

ज्यो ही हो जाता कम सफल सब अपना हाथ बताते है ,

ज्यो ही हो जाता कम विफल सब अपना हाथ हटाते है ।।

जग की माया बहुत निरश है, सब सुख साधन क्षणिक मात्र है।

अपना कर्म यदी श्रेष्ठ हो ,तो यह जीवन सुगम सरल है।।

~ कुनाल सिंह