~ तमस ~
संभावनाओ में गोते लगाते राष्ट्र
अक्सर उन्ही के गहरे गर्त में डूब जाते है
क्या पता ये सम्भावनायें घोतक हो
भेषि हो ऐसे तमस की, अंधेर गर्तों की
जो चमकती है
केवल अंधकार को, भय को,मृत्यु को
जिसमे डूब गया था यूरोप ,मुसोलिनी हिटलर
जिन का आधार केबल तलवारे
और कटे सरो की पुण्यबेदि हो
और उनसे उपजा तमस हो
वे राष्ट्र चूसते है रक्त अपने ही अंगो का
जैसे चूसा था यहूदियो को जर्मन ने
खदानों में दबता मजदूर,
खेतो में फांसी झूलता किसान
और दंगो में जलती लाशें
शायद ये देश नही अपमार्जक हो
उसी पुण्यबेदि का ।
~ सचिन यादव


