जिसनें जन्मा इस जग में...... अमृत सा स्तनपान कराया..!! हाथ पकड़कर जिसने अपने..... कदमताल हमसे करवाया..!! मिश्री सी आवाज से जिसने.... बोल-चाल हमको सिखलाया..!! ख़ुशी की ख़ातिर जिसनें मेरी.... ख़ुदके दर्द को सदा छुपाया..!! तो बोलों मैं कैसे कहदूँ..... ख़ुदा नही देखा हैं, ख़ुदा नही दूजा हैं..!! ख़ुद को भूखा रखकर जिसनें... मेरा हरदम उदर भरा है..!! देवों तक जिसने घूमा है.... मेरी ख़ातिर की पूजा है..!! लोरी गीत सुनाई जिसने.... बेहतर सीख सिखायी है..!! मेरे ख़र्च के कारण जिसनें... सारा रुपया खोया है..!! तो बोलो मैं कैसे कहदूँ... ख़ुदा नही देखा है, ख़ुदा नही दूजा है..!!