वही जो एक समय ख़ामोशी समझ जाते थे,
अब चीखता रह जाता हूँ उनके पीछे, मगर नहीं सुनते.....
वही जिन्हें आँखों में देखकर दर्द जानने का हुनर था,
अब सिसकता रह जाता हूँ उनके सामने, मगर नहीं सुनते.....
वही जो बांध कर रखते थे मुझे अपने बाजुओं के पाश में,
अब बिखरता पड़ा रह जाता हूँ उनके पीछे मगर नहीं सुनते....
जो मेरे बिन देखते न थे, न सुनते थे, न ही मिलते,
अब वो दुनिया भर को सुनते है मगर मेरी नहीं सुनते....।।।।


