कुछ हक़ हमने खुद से छोड़े,

कुछ हक़ हमसे फिर छीने गए....

कुछ को हमने जाते देखा,

कुछ अपने हमको छोड़ गए....

कुछ चंद दिन आँखे नम होंगी,

जब रुख्सत हम हो जाएंगे...

कुछ लोग नए, कुछ लोग पुराने,

फिर जगह हमारी ले जाएंगे...

कुछ धुंधली सी मेरी यादें,

कुछ हलकी सी मेरी बातें,

लोग कहकर तुम्हें रुलायेंगे....

कुछ मुझसे परेशां रहने वाले,

फिर खुश थोड़ा हो जाएंगे...

अब जाते-जाते यह भी बोलो,

क्या याद तुम्हें हम आएंगे..??

क्या याद तुम्हे हम आएंगे..??