उसकी शहद-सी आँखों में,
सुकून और ज़िंदगी थी.....
तुम खंजर और छुरियाँ लेकर,
धार ढूंढते फिरते हो.....
उसकी मृदु-सी बोली में,
शीतलता और नमी थी....
तुम मशाल और माचिस लेकर,
आग ढूंढते फिरते हो....
उसके मन की कोमलता में,
प्रेम और शक्ति थी.....
तुम चित्त पर रणभेरी बजाये,
धनु-बाण ढूंढते फिरते हो.....
भरी जवानी की कसी भुजाओं में,
दंभ और अकड़ थी....
इक तिनका जो पड़ा नयन में,
जल-तालाब ढूंढते फिरते हो.!


