जो तुम मेरे साथ करते हो, ग़लत है..
अपने होने का दिखावा करते हो, ग़लत है..
यूँ मेरी झूठी फिक्र करते हो, ग़लत है...
वादों की नुमाइश करते हो, ग़लत है...
लोगो से वफ़ा करने से डरते हो, ग़लत है..
तिल-तिल कर तनहाई में मरते हो, ग़लत है...
यूँ तो मुद्दे और मस्ले बहुत हैं लिखने....
उगलियों को तेरा ही ज़िक्र अजीज़ है, ये ग़लत है...


