क्या कहें, क्या-क्या देती है किताब,
देखो- रखो तो कुछ नहीं,
पढ़ो लो तो असमां से भी ऊंचा ले जाती है किताब,
क़ीमत तो कुछ नहीं लेकिन बहुत क़ीमती है किताब ।
क्या कहें, क्या-क्या देती है किताब ,
ज्ञान,उड़ान , इज्जत सपने और
अनगिनत चीजें देती है किताब।
कितना कुछ देती है किताब और,
कुछ भी नहीं बदले में लेती है किताब।
पढ़ो किताब , पढ़ो किताब , पढ़ो किताब
जीवन में पाओ सिर्फ़ ख़िताब, सिर्फ़ ख़िताब और सिर्फ़ ख़िताब।
बस इतना ही तो देती है ये छोटी सी किताब,
क्या कहे, क्या-क्या देती है ये किताब।।

