मैं पर्वत हूं तेरे खातिर,तूं पर्वत की नदियां मेरी,

जान मेरी एक बात समझ ले, तुझ से ही तो दुनिया मेरी,


 तूं ही चांद है, तूं ही तारा ,

तुझ से ही तो सरगम मेरी,

 तुझ बिन एक पल सौ बरस लगे हैं,

 तुझसे ही है चलती धड़कन मेरी ।


 आफताब की रश्मि तूं ही,

 तू तारों की टिमटिम मेरी 

आंधी बिजली है तूं ही और इंद्रधनुष के रंग तूं ही,

 सावन के मौसम में बरखा की, तूं ही है ये रिमझिम मेरी ।


तूं ही झील है तूं ही है झरना,

 तेरा नूर ही है प्रकृति मेरी ,

छोड़ ना जाना इस राजा को,

तुझ बिन जान निकलती मेरी।


जान मेरी एक बात समझ ले,

 तूं ही है यह दुनिया मेरी, तूं ही है यह दुनिया मेरी।


Sachin khatri(raja)