मोहब्बत मेरी ठुकरा के,
तूं बहुत पछताएगी,
जब तेरी सहेली तुझे
मेरी कामयाबी के किस्से सुनाएगी,
छत पर बैठे तारे गिन गिन,
तूं मुझे भूलना चाहेगी,
कुछ भी कर लेना चाहे मगर,
मुझे भूल ना पाएगी,
गली मोहल्ले के हर कोने में तुझको,
मेरी याद सताएगी,
क्यूं ठुकराया मैने उसको,
ये सोच के तूं पछताएगी।
बंद कमरे में बैठ कर,
मेसेज पढ़ पढ़ रोएगी, ,
कॉल करना चाहेगी मुझको,
पर हिम्मत जुटा ना पाएगी ,
मंदिर मस्जिद गिरजाघर में, ,
हर एक दर पे जाएगी,
मांगेगी खुदा से मुझको लेकिन,
मुझसे मिल ना पाएगी।
पत्ता पूछेगी सब से तूं,
मुझे ढूंढना चाहेगी,
अब वो पत्ता हो गया अस्त,
उसे ढूंढ ना पाएगी,
अपने आप से होगी खफा तूं,
खुद को हर पल कोसेगी,
राजा जैसा यार गंवा के
हर पल पल इतना रोएगी।
और मोहब्बत मेरी ठुकरा के पगली,
तूं बहुत पछताएगी,
जब तेरी सहेलियां तुझे,
मेरी कामयाबी के किस्से सुनाएगी।
sachin khatriraja)


