मां की ममता पे ऐसे अल्फ़ाज़ लिखूं,

बस जो भी लिखूं मां तेरे नाम लिखूं,

लिखने बैठूं जब भी कुछ में,

सोचता हूं क्या क्या बात लिखूं।


तेरे हर किस्से को मां,

मन करता हजार बार लिखूं,

तेरी ममता छुपी है इतनी,

कि तुझपे गीता कुरान लिखूं।


तेरे प्यार के खातिर मां मैं,

अपना सब कुछ तुझपे वार लिखूं,

तेरे लिए तो मां मैं अपनी,

इस जीवन का भी त्याग लिखूं।


तूने हमको इतना प्यार दिया कि,

तेरे प्यार पे एक किताब लिखूं,

उसको पढ़के हर एक शख्स कहे, 

कि मै भी मां पे कुछ अल्फ़ाज़ लिखूं


और मां,

लिखने बैठूं जब भी कुछ में,

सोचता हूं क्या क्या बात लिखूं,

मां की ममता पे ऐसे अल्फ़ाज़ लिखूं,

बस जो भी लिखूं मां तेरे नाम लिखूं।


Sachin khatri(raja)