Poetry 1 min read 782.1K reads


पानी सी कल कल तू बही जा रही है,ये हवा का रुख ना जाने तुझे कहा ले जा रही है।

कुछ देर ठहर जा ए जिंदगी मेरे पास,पग पग पर इतना क्यों सता रही है।।

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