गुमसुम बैठना आदत नहीं,मेरी मजबूरी है ,बहुत दिनों से महबूब से हो गई जो दूरी है,इतना सितम ढ़हा गई ये मेरी मोहब्बत ,लगता है बिना जिए ही जिंदगी पूरी है।
गुमसुम बैठना आदत नहीं,मेरी मजबूरी है ,
बहुत दिनों से महबूब से हो गई जो दूरी है,
इतना सितम ढ़हा गई ये मेरी मोहब्बत ,
लगता है बिना जिए ही जिंदगी पूरी है।