अगर मैं कहूं कि मैंने तुम्हारी तस्वीरें 

मेरे कमरे कि दीवारों पे लगा रक्खी है,

तो तुम मेरी ये बात मानोगी क्या?


अगर मैं कहूं कि तुम्हारी दी हुई किताबों मे

मुझे अबतक तुम्हारी ही खुशबू आती है,

तो तुम मेरी ये बात मानोगी क्या?


अगर मैं कहूं कि मेरी लिखी कविताओं मे

मैंने सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा ही ज़िक्र किया है,

तो तुम मेरी ये बात मानोगी क्या?


अगर मैं कहूं कि किसी रोज़ तुमसे बात नहीं हो पाती

तो मेरी रातें मुझे सोने नहीं देती,

तो तुम मेरी ये बात मानोगी क्या?


और ऐसी कई सारी बातें हैं जो मैं तुम्हे बताना 

चाहता हूं और अगर कभी बता भी दूं,

तो तुम मेरी वो बात मानोगी क्या?