(कोरोना हारेगा)
अनहद पीड़ा, भयावह दृश्य, लाचारी...
जिसकी बदौलत बन्द हुई दुनियादारी...
अब बस कुछ ही दिनों की बात है...
मंज़र बदल से जाएंगे...
ये दिन भी गुजर जाएंगे...
(कालाबाजारी)
वे लोग जो मानवता पर कलंक हैं...
जिनमें मनुष्यों जैसा न कोई अंश है..
जिनको जरुरी है अशर्फी, दूसरे की जान से...
वे भी सम्भल से जाएंगे...
ये दिन भी गुजर जाएंगे...
(चिकित्सा सुविधा)
जितनी भी है सुविधा, उसमें गुजारा कर रहे हैं...
यमराज से भी दो-दो हाथ करने में न डर रहे हैं...
सत्-सत् नमन उन चिकित्सकों, उन भेषजों को...
जाते-जाते भी जानें बचा जाएंगे...
ये दिन भी गुजर जाएंगे...
सचिन चतुर्वेदी (द व्हाइट टाइगर)
राजेन्द्र नगर, इंदौर

