अजब ख्वाब आँखों मे लेकर चला मैं,
मैं जिंदगी, ये जीने फिर से चला में,
हैं कुछ ख्वाब जो आंखों में है क़ैद मेरे,
उन्हें जिंदगी, अपनी बना फिर चला मैं,
अजब ख्वाब आँखों मे लेकर चला मैं,
मैं जिंदगी, ये जीने फिर से चला में,
गिरा हूँ कई मरतबा मैं भी जमीन पे,
मगर हौसला अब भी जिंदा है मन मे,
उसी हौसले संग, बस बढ़ता चला मैं,
मंजिल का अपनी निशाँ ढूंढता मैं,
अजब ख्वाब आँखों मे लेकर चला मैं,
मैं जिंदगी, ये जीने फिर से चला में,
है कोशिश यही, मैं पा लूँ वो सब
जो अब तक था ख्वाबों में आता रहा,
जिसे देख कर, मन ये मेरा मचलता रहा,
तड़पता रहा, बिखरता रहा
उस हर सपने को फिर से जीता चला मैं,
अजब ख्वाब आँखों मे लेकर चला मैं,
मैं जिंदगी, ये जीने फिर से चला में,
कभी जो, मुझे देखते भी न थे,
अब नज़रों को उनकी अखरने लगा, मैं
जो मेरे साथ चलने का वादा थे करते,
जलाता उन्हें, खुद से फिर चला मैं,
अजब ख्वाब आँखों मे लेकर चला मैं,
मैं जिंदगी, ये जीने फिर से चला मैं,
कभी न कभी मेरी मंजिल मिलेगी,
मेरी हस्ती फिर सबसे उपर ही होगी,
उठेगी मुझे देखने को, तेरी नज़रे
एक ऐसी उम्मीद लेकर चला मैं,
एक अजब ख्वाब आँखों मे लेकर चला मैं,
मैं जिंदगी को फिर से जीता चला मैं