सज़ा चाहे जो हो, ख़ता तो बताओ।

ग़म-ए-दिल को जाना, न इतना दुखाओ।

युं दूर क्यों खड़े हो, ज़रा पास आओ।

ये रंजिश है कैसी, हमें तो बताओ।

युं नज़रें चुरा के तुम, दिल न दुखाओ।

गर शिकायत है कोई, तो खुलकर बताओ।


मैं चाहता हूं तुम को, तुम चाहो न चाहो।

तुम आज़ाद हो, जहां जाना है जाओ।

गोया कि मैंने तुमको, रोका ही कब है।

ये हिन्दुस्तान है, यहां आज़ाद सब है।

ये तुम सोंचों कि, तुम को करना क्या है।

वो मैं ढूंढ लुंगा, जो भी मेरी दवा है।

ये आज़ाद मंज़र, खुला आसमां है।

उड़ जाओ अब तुम, गर तुम्हारी रज़ा है।


न सोंचों तुम इतना, कि बिस्मिल का क्या होगा।

तुम जाओ ख़ुशी से ,जो होना है होगा।

न आंखों से मैं तो, रोऊंगा कभी भी।

न राहों में तुमको, मिलुंगा कहीं भी।

जो मिल भी गया तो, तुम न होना उदास।

तुम को पहचानने, की ग़फलत न होगी।

मोहब्बत किया है, मोहब्बत करूंगा।

मोहब्बत में हम से, तो नफरत न होगी।


मगर एक बात तुम, मेरी याद रखना।

कि रक़िब को मेरे, सदा शाद रखना।

वो मुझसा नहीं है, न दिल उसका टुटे।

रहना संभल कर, कहीं वो तुम्हारी आबरु न लुटे।