अगर ये ना हुआ मुमकिन, फिर मिल जाये कही न कही. चलते राह मे फिर किसी मोड़ पे, अब की जो हम बिछड़े। इस जहान को अता करके उसके सारे तकल्लुफ हम फिर मिलेंगे एक बार, हमेशा हमेशा के लिए। उसी शहर मे जो अब तक सिर्फ ख्वाबो मे है जिस शहर की सड़को पर राह तकती आँखे नही है जिस शहर की कमरो मे तनहाईयाँ नही रहती बिस्तरो पर करवटे, सिस्कीयाँ, अंगडा़ईयाँ नहीं रहती जिस शहर के बारिश मे तन भिगने का डर नही होगा वही होगा जो मन मे होगा, लवो पे अगर मगर नही होगा ये सुबह को उठाता आफताब नही होगा, ये रातो को सताता महताब नही होगा। ये मध्दम होते तारे नही होंगे, आँखो से झुपते नजारे नही होंगे। सिर्फ मै रहुँगा, तुम रहोगी, और कुछ भी नही शायद हमारा वजुद भी नही, रहेगा तो सिर्फ और सिर्फ यकिन। यकिन जो ज़हन के किसी आखिरी सफे मे आखिरी है। हो सकता है थोड़ी देर हो जाये, काम जाद है। बहुत कुछ फर्ज अदा करना है, थोड़ा कुछ बया करना है। इस जहान को अता करके उसके सारे तकल्लुफ हम फिर मिलेंगे एक बार, हमेशा हमेशा के लिए। जब हम मिलेंगे मै तुम बनुँगा तुम मै बनना, फिर वही जो किया है, सब कुछ फिर करके देखेंगे। तुम खुद को उतना तड़पा पाती हो की नही जितना मै तड़पा हुँ। मै खुद को उतना सता पाता हुँ की नही जितना तुम्हे सताया था। क्या दिल दोनो के मचेलेंगे, क्या आँख दोनो के छलकेंगे? या अब की तरह तब भी सिर्फ एक के साथ होगा। जानने की हसरत तो बहुत है, और जल्दबाजी भी पर क्या करूँ मजबुर हुँ, किसी की हसरत तो मै भी हुँ। इस जहान को अता करके उसके सारे तकल्लुफ हम फिर मिलेंगे एक बार, हमेशा हमेशा के लिए।bhi