आ जी ले, की लम्हे यादे न बन जाये। दिलकश आँखो-आँखो मे बीते पल, महरूम हो उलझ आँसुओं मे न रह जायो फकत वही नही हम भी उसके खव्वबो मे आये। आ जी ले, की लम्हे यादे न बन जाये। अजब सा रुमानियत है आज फिजाओं मे मानो हर एक चिज बहकने को तैयार बैठी हो तुम शराब तो घोलो इन हवाओं मे। रह-रह के ये लम्हा इस कदर मचल रहा है जैसे की अक्शर मेरा मन मचल जाया करता है। मन्नतो की तरह मिले हैं ये लम्हे, कही टुटे हुए कुछ वादे न बन जाये। आ जी ले ,की लम्हे यादे न बन जाये। समुंदर मे उठती लहरो की तरह है ये लम्हे, बस पल दो पल के लिए। इन लहरो मे से सलीके से बच के निकल जाना, दुनियादारी और उसकी हुनरमंदी है। इन लहरो के मौजो मे खो जाना इन हिचकोलो के गोद मे सर रख के सो जाना ही तो जिन्दगी है। बाहें खोले मिलो इन लहरो से, आज भीगोदो खुदको इस पल मे, क्या पता अगले ही पल ये बिते हुए बाते न बन जाये। आ जी ले, की लम्हे यादे न बन जाये। इस पल की हवाओं और उसके सरगोशियों मे, झुपा एक लहज़ा है फुलो सा। हर लफ्ज से खुशबु आयेगी, जब बात करोगे हर लफ्ज और करीब लयेगी, जब बात करोगे हर लफ्ज मे तुम उसके, वो तुम्हारी हो जायेगी, जब बात करोगे। भुला के सब कुछ, कुछ पल को बस इस पल के हो जाओ। अपनी खुशबु ले के तुम भी, इसमे सामील हो जाओ। नजर चुरा के न निकलो इन लम्हो से कही जो आज गुफ्तगू है कल फसादे न बन जाये। आ जी लो, की लम्हे यादें न बन जाये। हर बार अपने मन का चलाया तुमने इस बार मन को, अपनी मनमानी कर लेने दो इस बेसबरीया को, थोड़ा सा सैतानी कर लेने दो ये पल बस तुम्हारा है इंतीजार लिए तुम्हारे वजुद का, अपने पल सबसे छिन लो, और पर्माण दो अपने होने का। आज वजह न है तो कर के कुछ बहाने तु आ जा। उठ झोड़ सब सिरहाने तु आ जा। कही जो आज दिन है, कल राते न हो जाये। आ जी ले, की लम्हे यादे न हो जाये।