
आ जी ले, की लम्हे यादे न बन जाये।
दिलकश आँखो-आँखो मे बीते पल,
महरूम हो उलझ आँसुओं मे न रह जायो
फकत वही नही हम भी उसके खव्वबो मे आये।
आ जी ले, की लम्हे यादे न बन जाये।
अजब सा रुमानियत है आज फिजाओं मे
मानो हर एक चिज बहकने को तैयार बैठी हो
तुम शराब तो घोलो इन हवाओं मे।
रह-रह के ये लम्हा इस कदर मचल रहा है
जैसे की अक्शर मेरा मन मचल जाया करता है।
मन्नतो की तरह मिले हैं ये लम्हे,
कही टुटे हुए कुछ वादे न बन जाये।
आ जी ले ,की लम्हे यादे न बन जाये।
समुंदर मे उठती लहरो की तरह है ये लम्हे,
बस पल दो पल के लिए।
इन लहरो मे से सलीके से बच के निकल जाना,
दुनियादारी और उसकी हुनरमंदी है।
इन लहरो के मौजो मे खो जाना
इन हिचकोलो के गोद मे सर रख के सो जाना
ही तो जिन्दगी है।
बाहें खोले मिलो इन लहरो से,
आज भीगोदो खुदको इस पल मे,
क्या पता अगले ही पल ये बिते हुए बाते न बन जाये।
आ जी
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