यह एक दिन की कानाफूसी हैं

जिसे सुन-सुन

इतिश्री कर लेते है,

यूँ पर्यावरण बचते है।


मानस मारता है,

मानस मरता है।

इसके वश में नही है

कि यह धरती को मार सके।


अपने अंत की भविष्यवाणी सब मिलकर लिख रहे है,

पहचानो, रो लेना, और अंत में वापस मर जाना।

बस, यही इस दिन की बात है।

कि अपने अंत में भी मानस को अपनी महानता दर्शानी है।