
कि बड़ी संकरी-सी गलियां है मेरे शहर की
गलियों से ज्यादा उनके दिल छोटे हैं
ज़ेबे भरी हुई है,सबकी सिक्कों से,
मगर जब निकाला तो सारे ही खोटे हैं।
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कि बड़ी संकरी-सी गलियां है मेरे शहर की
गलियों से ज्यादा उनके दिल छोटे हैं
ज़ेबे भरी हुई है,सबकी सिक्कों से,
मगर जब निकाला तो सारे ही खोटे हैं।