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कफ़स(पिंजरा)

मैं क़फस में कैद परिंदा नहींजीनी है जिंदगी रहना महज जिंदा नहींइल्म है मुझे मेरे हद-उफ़ुक काये मसला नहीं तुम्हारे मतलब का

उफ़ुक-सीमा

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