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"आस"


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सांकल खड़खड़ाती भोरपूरा पका चांदउनींदी सी एक चिड़ियारातों न सोई दो आंखेंघर लौट जाने को उत्सुक तीन तारेखिल जाने को आतुर चार कलियांऔरमीलों पसरी शून्यता.............

आस सर्व-व्यापक है !!!

#sona

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