विद्यालय को चले आज वो नन्हें नन्हें पैर,

करते थे अब तक केवल वो आंगन की ही सैर ।

छोटे-छोटे मित्र बन रहे

लगता जैसे पुष्प खिल रहे,

ऊंच नीच है यहां न कोई

राजनीति है यहां न कोई,

नही जाति का बन्ध यहां पर

है विचार स्वच्छन्द यहां पर,

सही कहें तो ज्ञान यही है

सपनों का सम्मान यहीं है,

सबसे रिश्ता माने अपना नही कोई है गैर।

विद्यालय को चले आज वो नन्हें नन्हें पैर ।।