वैसे तो कभी उठती ही नहीं.....
पर जब उठती हैं तो यूँ लगता है....
कुछ कहने वाली हैं तेरी आँखें.....!!
मदमस्त, मस्त, घनघोर घटा सी...
प्यासी कुछ कुछ मृगतृष्णा सी...
कुछ नम नम सी...
हैं कम कम सी...
प्यार भरी सी कजरारी सी..
बिन मय के ही मतवारी सी..
वैसे तो कभी उठती ही नहीं...
पर जब उठती हैं तो यूँ लगता है...
कुछ कुछ मतवाली हैं तेरी आँखें...!!
कुछ बात है इनमें जो ये लगती हैं गज़ब....
कुछ तो है ज़रूर इनमे उदासी का सबब...
कुछ राज़ छुपाये रहती हैं....
गुमसुम हैं ना कुछ कहती हैं...
कुछ इनमे जो सूखे मोती हैं...
ये जो छुप छुप के रोती हैं....
वैसे तो कभी उठती ही नहीं...
पर जब उठती हैं तो यूँ लगता है...
कि जग से निराली हैं तेरी आखें...!!
दिल करता है रोशन कर दूं....
इनको सब कुछ अर्पण कर दूं.....
प्रेम, प्रीत, उल्लास डाल...
जग भर की खुशियाँ भर दूं ......
पर मेरी नीयत से डरी डरी.....
शक्की प्रश्नों से भरी भरी .....
वैसे तो कभी उठती ही नहीं...
पर जब उठती हैं तो यूँ लगता है...
कि बड़ी सवाली हैं तेरी आखें...!!