हम भाई समझ कर प्यार करें, वो बार बार तकरार करें,
आगे आ कर गले मिलें, और पीठ पीछे वार करें,
हम सोच रहे हैं समझाना, वो चाह रहे हैं टकराना,
ये बिन सोचे समझे ही, वो चाल चल रहे बचकाना,
कि आखिर ये छल कपट, हम कब तक सह सकते हैं,
यूँ बार बार ठगे जाकर, हम चुप कैसे रह सकते हैं,
शांति, धैर्य और भ्रात्र प्रेम का, जिस पल दामन छूट गया,
जिस दिन भी ये सहन शक्ति का, बाँध कहीं से टूट गया,
वो सोच नहीं सकते हैं ऐसा, घमासान हो जायेगा,
ख़त्म उसी दिन इस दुनिया से, पाकिस्तान हो जायेगा ।
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वो शीश काट ले जाते हैं, हम फिर भी गले लगाते हैं,
बेशर्मी से अपनी गलती, वो बार बार दोहराते हैं,
नादान समझ वो खेल रहे, वो मार रहे हम झेल रहे,
हम तो ये सोचे बैठे हैं, अच्छा है अपना मेल रहे,
लेकिन वो आते बाज नहीं, अपने घटिया आघातों से,
लातों के भूत बने बैठे, माने न शायद बातों से,
इन मेल मिलाप की बातों को, हम जिस पल भी भूल गए,
जिस दिन भी अंतर में गहरे तक, उनके तीखे शूल गए,
बिलकुल साफ़ जहाँ से उनका, नामो-निशान हो जायेगा,
ख़त्म उसी दिन इस दुनिया से, पाकिस्तान हो जायेगा ।
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दस बीस बंदूकों पर अपनी, दो चार पटाखों पर अपने,
मुट्ठी भर सैनिक ले कर , वो देख रहे कश्मीर के सपने,
समझ न उनको आता है, की बच्चा बड़ा हो जाता है,
बाप का अपने लेकिन फिर भी, वो बाप नहीं बन पाता है,
वो भूल गए होंगे उनको, पहले भी धुल चटाई थी,
पर ये तो याद उन्हें होगा, कारगिल में मुह की खायी थी,
कुछ नाम मात्र के रिश्तों को, जिस पल भी हमने तोड़ दिया,
जिस दिन भी दया अहिंसा को, हमने पीछे छोड़ दिया,
सिन्धु नदी का सारा पानी, लहुलुहान हो जायेगा,
ख़त्म उसी दिन इस दुनिया से, पाकिस्तान हो जायेगा ।
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उनसे कह दो सुधर जाएँ, वरना वो पछतायेंगे,
हम पत्थर हैं हमसे टकरा कर , चूर चूर हो जायेंगे,
फिर उनका साथ निभाने को, जो कोई आगे आएगा,
वो हमारी ठोकरों से, ख़ाक में मिल जायेगा,
हम हिन्दुस्तानी हैं पल भर में, ऐसा विनाश कर डालेंगे,
गर अपनी पर आ जाएँ तो, सर्वनाश कर डालेंगे,
जिस दिन भी रण में कूद पड़े, उनकी औकात दिखा देंगे,
उनके घर में कब्र खोद कर, उनको ही दफना देंगे,
इस्लामाबाद, लाहौर, करांची, सब कब्रिस्तान हो जायेगा,
ख़त्म उसी दिन इस दुनिया से, पकिस्तान हो जायेगा ।
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