एक मित्र के घर पर एक बार,
मैंने देखा उसका विचित्र व्यवहार,
एक तस्वीर के आगे धूप जलाई , हाथ जोड़े , शीश नवाया,
परन्तु कुछ भी मेरी समझ में न आया।
आप सोच रहे होंगे - क्यों,
आखिर क्यों समझ में न आया,
ऐसा तो सभी लोग करते हैं,
तस्वीरों के आगे धूप जलाते हैं और नमन करते हैं,
तो साहब - इसका कारण था '' खाली फ्रेम''
जी हाँ खाली फ्रेम!
उसमे न कोई तस्वीर थी, न कोई चित्र कुछ नहीं,
मैंने पूछा- भाई इस खाली फ्रेम के आगे सर झुकाया है,
तुमने इसमें कोई फोटो क्यों नहीं लगाया है ?
वह बोला-मेरा इस खाली फ्रेम के प्रति इतनी श्रद्धा व प्रेम क्यों है
यह जानना चाहते हो की मेरे घर में यह खाली फ्रेम क्यों है।
तो सुनो - यह स्वतंत्रता संग्राम के उस शहीद की तस्वीर है
जिसका नाम न तुम जानते हो न मैं - "अनजान शहीद"
उसके ह्रदय में भी देशप्रेम की प्यास थी
अपने वतन पर मिटने की
उसके मन को भी आस थी,
तभी तो कूद पड़ा था स्वतंत्रता संग्राम में,
किन्तु ज्यादा समय तक देश सेवा नहीं कर सका
अपना नाम अमर नहीं कर सका।
कुछ करने से पहले ही लाशों की भीड़ में खो गया,
प्रथम दिन ही शहीद हो गया ।
आज़ाद, बोस और भगत सिंह
इनको तो सभी जानते हैं,
उनके नाम को पहचानते हैं,
लेकिन मेरे दोस्त अब तुम ही बताओ -
उस शहीद की तस्वीर मैं कहाँ से लाऊं,
उसे किस नाम से बुलाऊं ?
और तभी से मेरे ह्रदय में भी उमड़ आया
उस शहीद के प्रति असीम श्रद्धा व प्रेम
आज मेरे घर में भी धुप करने और सर झुकाने के लिए लगा है
एक "खाली फ्रेम"।