इश्क है मेरा इसे ना दिल्लगी समझा करो, इश्क का ही नाम है ज़िन्दगी समझा करो । प्यार में तेरे सनम घूमता हूँ दर बदर, प्यार को मेरे कभी ना आवारगी समझा करो । जान से ज्यादा सनम चाहता हूँ मैं तुम्हें, चाहतों को तुम मेरी कम नहीं समझा करो । मेरे कहने पे न जाओ दिल से अपने पूछ लो, दिल दीवाना है पर दिल की बात भी समझा करो । आशिकों की किस्मत में पत्थर उठाये लोग हैं, आसां नहीं है जानेमन आशिकी समझा करो । ज़िन्दगी का क्या भरोसा कल रहे या ना रहे, मेरी हर मुलाकात को आखिरी समझा करो ॥