दुनिया में हमने कुछ ऐसे, मंज़र भी देखे हैं यारों, अपने अपनों की बगलों में खंज़र भी देखे हैं यारों । कल जिनको अपना समझा था, अब उनके अपने और हैं, चाहत के रस्तों पर हमने गहबर भी देखे हैं यारों । गहल बन गया है बस दिल, एक ठेस लगी और तितर बितर, प्यार के फूलों पर चलते नस्तर भी देखे हैं यारों । है गाह यहाँ पर हर कोई, सब वफ़ा का सौदा करते हैं, दिल तोड़ने वालों के हमने दफ्तर भी देखे हैं यारों । हर तरफ है फैली दुनिया में, केवल नफरत की हरियाली, हमने तो वफ़ा के बागीचे, बंज़र भी देखे हैं यारों । और बाढ़ आ गयी दुनिया में, साहिल की बौछारों से, जो तरसे पानी को ऐसे सागर भी देखे हैं यारों ॥