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ज़ुल्फ़


कोई उसे अपने जुल्फों को संभालने को कहो, बार बार चेहरे पे आ कर अटकती है… कोई उसे मेरे शरीर को संभालने को कहो, बार बार मयख़ाने पे आ कर अटकती है…

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