लगता था कि बस हमारी ज़िन्दगी में कुछ ज़्यादा ग़म है झांका ज़रा दूसरी ज़िन्दगी में तो हर आंख नम है। भाग रहा है हर शख्स अपनी चाहत के पीछे जो उसे मिला क्या वो इतना कम है। खुदा ने तो दिया है बहुत कुछ इंसान को बस जो दिया है उसकी थोड़ी कदर् कम है। क्यूं नही मिल जाती हर वो चीज़ जो हम चाहते है! बेबसी तो ये है जहाँ है हमारी चाहत वहाँ उम्मीद कम है। हर शख्स की उम्मीद की है ग़लत मंज़िल शायद वजह है यही हर शख्स की ज़िंदगी में खुशी कम और ज्यादा ग़म है।