जीवन की तमाम पीड़ाएंजिनमें टूटना स्वाभाविक था ..मैंने ख़ुद को बिखरने से बचाए रखा..ईश्वर का और स्वयं कासम्मान बनाए रखने के लिए,मैंने ख़ुद को जोड़े रखनासबसे ज्यादा ज़रूरी समझा !_रुचि सिंह
जीवन की तमाम पीड़ाएंजिनमें टूटना स्वाभाविक था ..मैंने ख़ुद को बिखरने से बचाए रखा..ईश्वर का और स्वयं कासम्मान बनाए रखने के लिए,मैंने ख़ुद को जोड़े रखनासबसे ज्यादा ज़रूरी समझा !
_रुचि सिंह