निस्फ़ सी रही ज़िंदगी

कुछ ख़्वाब अधूरे रहे

कुछ ख्वाहिशें अधुरी रही

कुछ कहानियां अधूरी सी रह गई ...


ये ज़ुल्मत भी खत्म होगी ...

एक नई सहर ज़रूर आयेगी 

उम्मीदों से ही रौशन है जहान

कि ज़िंदगी फिर से मुस्कुराएगी...


_रुचि सिंह

Twitter- @ruchi_mgr