मुकद्दर ही था जो हम ना मिले...लिखा गया है हमसे पहले हमारी तक़दीर को !_रुचि सिंह
मुकद्दर ही था जो हम ना मिले...लिखा गया है हमसे पहले हमारी तक़दीर को !
_रुचि सिंह