ज़ेर-ए-आब हो जाएंगे एक दिन हम या कि तुम..जाना इस हसीं जहाँ से सबका मुक़द्दर है..!_रुचि सिंह
ज़ेर-ए-आब हो जाएंगे एक दिन हम या कि तुम..जाना इस हसीं जहाँ से सबका मुक़द्दर है..!
_रुचि सिंह