खिड़की पर कभी बैठो तो बाहर की दुनिया दिखाई देती है..बैठे कहीं गहरे डूबे...तो खुद से मुलाक़ात हो जाएगी !_रुचि सिंह
खिड़की पर कभी बैठो तो बाहर की दुनिया दिखाई देती है..बैठे कहीं गहरे डूबे...तो खुद से मुलाक़ात हो जाएगी !
_रुचि सिंह