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एक अरसा गुज़रा..


निगाह मेरी रह-रह कर यूँ दरवाज़े पर जा ठहरती है ..जैसे एक अरसा गुज़रा हो, मुझे दस्तक को सुने हुए।

_रुचि सिंह

— Twitter- @ruchi_mgr
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