निगाह मेरी रह-रह कर यूँ दरवाज़े पर जा ठहरती है ..जैसे एक अरसा गुज़रा हो, मुझे दस्तक को सुने हुए।_रुचि सिंह
निगाह मेरी रह-रह कर यूँ दरवाज़े पर जा ठहरती है ..जैसे एक अरसा गुज़रा हो, मुझे दस्तक को सुने हुए।
_रुचि सिंह