____________खिड़की पे बैठे ..गुजार दी हमने सारी रात,चाँद के बहाने ..और एक वो हैं,जो झरोखे से झाँका तक नहीं करते।_____________रुचि सिंह
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खिड़की पे बैठे ..गुजार दी हमने सारी रात,चाँद के बहाने ..और एक वो हैं,जो झरोखे से झाँका तक नहीं करते।
_रुचि सिंह