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अर्धांगिनी


ये कह कर गए थे तुमकि दस्तूर है यही,बहुत अज़ीज़ हो कुछतो वो अक्सर छीन जाता है...पर तुम मुझसे कभी दूर गए ही नही..मैंने तुमको अपनी कविता में संजो लिया,और आज उनकी अर्धांगिनी हूँ मै !

_रुचि सिंह

— Twitter- @ruchi_mgr
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